भारत में दहेज प्रथा का असली जिम्मेदार कौन?

dowry in India Assam

Source: Deepawali

भारतीय समाज में फैली हुई अनेक कुरीतिया इस गौरवशाली समाज के माथे पे एक कलंक है ।इन्मे दहेज़ प्रथा हमारे समाज में एक प्रधान कुरीति है ।हमरे समाज में दहेज़ प्रथा दिनोदिन बढाती ही जा रही है ।इस्क मुख्य कारन यह है की आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है ।आज भी हमारे समाज में लड़कियों को बोझ समझ जाता है| और यही कारन है की आज भी लडकिया आगे नहीं बढ़  पा रही है ।पहले इस प्रथा के प्रचलन में भेट स्वरुप बेटी को उसके विवाह पर उपहार स्वरुप कुछ दिया जाता था ,परंतु आज दहेज़ प्रथा एक बुराई का रूप धारण करते जा रही है गरीब परिवार के माता पिता अपनी बेटियो का विवाह नहीं कर पाते ,क्यूंकि समाज के लोभी व्यक्ति उसी लड़की से विवाह करना पसंद करते है ,जो अधिक दहेज़ लेकर आती है.|

दहेज़ कम लाने पर शादी के बाद बहुओ को शारीरिक प्रतारणा दी जाती है ।इस्के जिम्मेदार लड़की और उनके माँ बाप है , क्यूंकि अत्याचार करना और सहना दोनों कानूनन अपराध है ।No Dowry in Assam

हमारे समाज में दहेज़ लेना और देना दोनों ही  कानूनन अपराध माना जाता है ।मा बाप बेटियो को बोझ मानते है उन्हें बचपन से ही बताया जाता है की वो पराया धन है ।उन्हे हमेसा यही बताया जाता है की वो लड़को से कम है| कन्या दान को माह दान माना जाता है ।लेकिन   हमारे समाज में लड़कियों को बोझ माना जाता है ।आज के इस आधुनिक युग में लडकिया किस छेत्र में लड़को से कम है ?लेकिन आज भी लड़कियों  के जन्म पर खुशिया नहीं मनाई जाती । अगर माँ बाप ही लड़कियो को बोझ समझेंगे तो ये समाज उन्हें क्या सम्मान देगा । जिस  लड़की को घर की लक्ष्मी के रूप में  बहु बनाके सम्मान के साथ अपने घर लेके आते है  उसे ही दहेज़ के लिए जलाया और मारा जाता है आखिर क्यों ?क्या गलती है उनकी यही की वो एक लड़की है , हर साल हजारो युवा दुल्हन अपने पति और अपने ससुराल वालो की बढ़ती हुई मांग को  पूरा न कर पाने के कारन जला कर हत्या करके मार दी जाती है । इस प्रकार के मामलो में परेसान करने वाली तथ्य ये है की वो महिला ही होती है जो अपने बहु को दहेज़ के लिए परेसान करती है । भारतीय समाज में दहेज़ प्रथा केवल महिलाओ का  शोषण है संक्षेप में दहेज़ इस उपधारण पर   आधारित है की पुरुष सर्वश्रेस्ट  है ,और लड़कियों को अपने  संगरक्षण में अपने घर से सम्पति और सामन अवश्य लानी होगी ।

दुल्हन के  परिवार  वाले को जो कठिनाईओ और अपमान का सामना करना परता  है वो असाधारण होता है|  इसके परिणाम स्वरुप समाज मे अनेक  बुराइयां  फ़ैल गई है जैसे :कन्या भ्रूण हत्या और चयनात्मक  लिंग परीक्षण के  बाद गर्वपात जैसी सामाजिक बुराइयो को प्रोत्साहन मिलता है ।इस्लिये लड़का और लड़की में  भेद भाव किया जाता है । क्यूंकि उनके शादी में  दहेज़ देना पड़ता है , और इसलिए उनके माँ बाप उनके पढाई में पैसा खर्च करना नहीं चाहते है क्यूंकि लड़की जितना आगे पढ़ेगी उन्हें उतना ही जादा दहेज़ देना पड़ेगा इसलिए माँ बाप लड़कियों को जादा नहीं पढ़ाते है ।अगर हर लड़की अपने पैरो पर खरी हो जाये तो उन्हें क्यों लड़के वालो को दहेज़ देना पड़ेगा | लड़के वाले खुद शादी करेंगे ।दहेज के कारन सुंदर पढ़ी लिखी कमाऊ लड़कियों की भी शादी नहीं हो पा रही है ।आज शादी का बंधन पवित्रता का नहीं बल्कि सौदेबाजी का  व्यापार बन गया है ।दहेज हत्या से सम्बंधित सूचना लगातार दी जा रही है  लेकिन फिर भैया दहेज़ हत्या के अपराधों की दर कम नई हो रही है ।लदकि और उसके माता पिता सामाजिक दबाब  और शादी टूटने के  भय से ऐसे बहुत कम अपराधों की सूचना दी  दी जाती है इसके अलावा ,  पुलिसः अधिकारी  दहेज़  से सम्बंधित सूचना की एफ. आई. आर दूल्हे पक्छ से रिशवत या दबाव के कारन दर्ज नहीं करते ।इन सबका कारन है महिलाओ  आर्थिक में   आत्मनिर्भरता  की कमी  और कम शैक्षिक  के स्तर वास्तबिक कारन है, जिसके कारन अपने ऊपर हो रहे अत्याचार  के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती है सरकार ने दहेज़ लोभियो को दण्डित करने के लिए अनेक नियम बनाये है । लेकिन ये प्रथा समाज में आज भी पनप रही है । यह समाज स्त्री और पुरुष  प्रधान होना चाहिए न की सिर्फ पुरुष प्रधान ।

dowry protest

Source: www

वर  को चाहिए की  वो जहा भी  विवाह करेगा ,वो दहेज़ के बिना होगा  तथा बहु को चाहिए की वो दहेज़ लोभी तथा उनके परिवार से सम्बन्ध रखने एवं विवाह करने से ही मना कर दे ।वर की योग्यता एवं पद के अनुसार ही दहेज़ की मांग की जाती है| कभी कभी तो वर पक्ष के लोग विवाह में ही दहेज़ की मांग करते है ताकि कन्या पक्ष के लोग विवाह टूटने के भय से उनकी मांगे पूरी करने पे विवश हो जाये।

आधुनिक  युग में कन्या को श्रेष्ठता उसके गुणों  से नहीं,  बल्कि उसके घर से  दहेज़ में दिए जाने वाले वस्तुओ से  की जाती है ।यहि कारण है की अनेक लड़कियां अविवाहित रह जाती है , या अयोग्य लोगो के पल्ले बांध दी जाती है ।लद्कियो को सबसे जादा जरुरत उनके माँ बाप और उनके साथ की होती है ।

अगर   हर  लड़की  अपने पैरो पे खड़ी हो जाती है तो इस समाज से हम दहेज़ प्रथा जैसी कुरीतियो को समाज से समाप्त कर सकते है क्यूंकि ये समाज स्त्री और पुरुष दोनों से चलता है ना की सिर्फ पुरुष से ।अगर हर लड़की वाले दहेज़ देने से मना कर दे तो लड़के वाले खुद शादी करेंगे क्यूंकि उन्हें अपने  खानदान के लिए वंश चाहिए होता है ।अत्याचार सहना भी एक कानूनन अपराध है । चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक ।हमरि भारतीय संस्कृति  में लड़कियों को लक्ष्मी का रूप माना जाता है । लड़के वाले समाज को दिखाने के लिए  बहु को लक्ष्मी बना कर अपने घर लेके आते है |  और फिर सुरू होता है लड़कियों का शोषण दहेज़ के लिए उन्हें प्रताड़ित किया जाता है , और जब वो  अपने घर से दहेज़ नहीं ला पति है तो उन्हें जला कर  मार दिया जाता है  ताकि वो अपने बेटे की दूसरी शादी करके जादा  दहेज़ ले सके|

यह  हमारी लड़ाई है  और हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी क्यूंकि हम सब कहते है की हमारा भारत बहुत आगे बढ़ गया है , बहुत तरक्की  कर ली है लेकिन क्या लोगो के सोच ने तरक्की की है ?  जी नहीं क्यूंकि आज भी बहुत लोग  है को अपनी बेटियो के पढाई के खिलाफ है आज भी इतने लोग है   जो २१  अपने  घर में  टीवी  , फ्रिज़ , बेड नहीं खरीदते है क्यूंकि वो अपनी बेटे की शादी का इंतजार करते है ।मा बाप बेटी की शादी में दहेज़ का रकम जोड़ने के लिए अपना घर तक बेच देते है और हम कहते है हमारा भारत महान है इनसबके सबसे बारे जिम्मेदार है लड़कियों के माता पिता ।वो आज भी लड़कियों को बोझ मानते है और उन्हें पढ़ने नहीं  देते है जिसके कारण लडकिया आत्मनिर्भर नहीं हो पाती और उनसे शादी करने के लिए लड़के वाले जादा दहेज़ की मांग करते है । लड़के वालो के माँ बाप दहेज़ नहीं लेते है बल्कि दहेज़ के नाम पे अपने बेटो को बेचते है जिसदिन लड़के अपने आप को बेचना बंद कर देंगे उसदिन दहेज़ अपने आप बंद हो जायेगा । जिस  समाज में बहुओ को प्यार के जगह यातनाये दी जाती है , वो समाज निश्चित रूप से सभयो का नहीं , नितांत  असभयो का समाज है । अब समय आ गया है की इस कुरीति को समूल उखाड़ फैके । और ये तभी हो पायेगा  जब सारा समाज लोभियो के प्रति आवाज उठाएगा । दहेज़ को हम या आप अकेले खत्म नहीं कर सकते है ,  हम सब को मिलके हमारे देश और समाज ये  दहेज़ प्रथा जैसे अभिशाप को ख़त्म करना होगा तभी हमारा भारत महान और आगे बढ़ पायेगा ।

दहेज़ प्रथा के खिलाफ सरकार द्वारा बनाई गई कमजोर नीतियों के कारण बनाये गए  कानून कारगर सिद्ध नहीं हुए । इस कुरीति को मिटाने  के लिए  सारे  माँ बाप , लड़की युवा वर्गो को जागृत होना पड़ेगा । दहेज़ लेने और देने वालों को बहिस्कार करना होगा तभी हमारा समाज इस कुरीति से मुक्त हो पायेगा|

dowry system in India Assam

Source: www

Priyanka Pandey is a student of Mass Communication and Journalism (MCJ) From Guwahati University IDOL.

As a graduate in Logic & Philosophy, she finds the gender imbalance prevailing in the Indian society very uncomfortable.

Apart from writing, she loves reading. An art enthusiast by soul.